मंत्र जाप साधना की वह स्तिथि है जब साधक साधना में लीन होने लगता है। माला से मंत्र जाप करने से हम जो ईश्वर की आराधना करते हैं उनसे हमारा डायरेक्ट कनेक्शन हो सकता है। मंत्र वह सीढ़ी है जो आपको ईश्वानुभूति सीधे सरल तरीके से आसानी से कराती हैं। रुद्राक्ष माला मंत्र मानसिक रूप में किया जाए तो इसका लाभ अधिक मिल सकता है। सबसे उत्तम रुद्राक्ष स्फटिक माला , एक माला में १०८ मनके होते है, जो पूरे ब्रह्माण्ड का प्रतीक है। १२ राशि,९ ग्रह, या सत्ताईस नक्षत्र व उनके चार चरण। कोई भी मंत्र के आगे ॐ लगाने से उस मंत्र की शक्ति बढ़ जाती हैं। माला कितनी करनी चाहिए, रोज गिनकर कितने मंत्र जाप किया जाए इसके कोई मापदंड नहीं है, यह ईश्वर से कोई सौदा या व्यापार नहि है, साधक के दिल में सच्ची भक्ति भावना होनी चाहिए।
मंत्र जाप के लाभ
जब साधक मंत्र जप ध्यान साधना दोनों साथ में करता है, तो चेतना एक शून्य अवस्था में पहुंच जाती हैं। रुद्राक्ष माला से मंत्र जाप करने से साधक की भक्ति सार्थक हो जाती हैं। इसीलिए जो साधक मंत्र अनगिनत , बिना रोज गिने रोज करते है बिना किसी लालच या मकसद के, की इतना मंत्र जाप करता हूं ईश्वर मेरा ये काम होना चाहिए, इच्छा पूरी होनी ही चाहिए, ऐसा करने से साधक एक शून्य में अटक कर रह जाता हैं। वहीं एक सच्चा साधक भक्ति भावना श्रध्दा से ईश्वर की ओर समर्पण की भावना रखता है उसे ईश्वरानुभूति होने लगती हैं। वह अपनेआपको एक सुरक्षा कवच में सुरक्षित महसूस करता है।
मंत्र जाप का फल
रुद्राक्ष स्फटिक माला से मंत्र जाप करने से मन भटकता नहीं है। मन एकाग्र हो जाता हैं, ध्यान पूरा मंत्र पर ही स्थापित हो जाता हैं। शारीरिक, मानसिक, आत्मिक तौर पर साधक का शुद्धिकरण होता हैं, आत्मा की उन्नति होती हैं। मंत्र जाप का फल सिर्फ साधक ही नहीं बल्कि उसके सम्पूर्ण परिवार को मिलता है। जप मंत्र ध्यान करने से एक ऊर्जा शक्ति का निर्माण होता हैं, साधक के अंदर से वह ऊर्जा शक्ति लगातार चारो ओर प्रवाहित होती रहती हैं। पूरे घर में विस्थापित होती रहती हैं। कोई बीमार व्यक्ति भी साधक की सकारात्मक ऊर्जा से ठीक हो सकता हैं ।यदी साधक साधना की सर्वोच्च ऊंचाईयों तक पहुंचा हो तो यह बिल्कुल संभव है।
मंत्र जाप शक्ति
रुद्राक्ष स्फटिक माला से मंत्र जाप करने से ,एक ही माला से एक ही मंत्र करने से वह मंत्र सिद्ध हो जाता हैं। कितने मंत्र जाप करने है यह हर साधक के समर्पण भाव पर निर्भर करता है।कितने बार मंत्र जाप करने से सिद्धि मिलेंगी , हर साधक के पीछले और इस जन्म पर भी निर्भर करता है। पहले हमारे लिए हुए अच्छे बुरे कर्म मिटना शुरू होते है उसके बाद हमें हमारी साधना का फल मिलना प्रारंभ होता है। यह निश्चित रूप से कहना कठिन है की किसे कब कितने समय बाद साधना का फल मिलेगा। कुछ समय बाद मंत्र जाप सिद्ध लगातार करते रहने से सिद्ध हो जाता हैं।यदि पूर्व जन्म में कठिन तप किया हो तो सिद्धि की प्राप्ति जल्दी भी हों सकती हैं। कई लोगो को यह भी शंका रहती हैं कि जो माला से मंत्र जप मंत्र करते है तो उसे धारण करे या नही निःसंदेह धारण कर सकते हैं, बल्कि मंत्र जाप की शक्ति आपके अंदर निरंतर प्रवाहित होती रहेंगी।
मंत्र माला जाप की विधि
आपको आसान को जमीन पर रखकर बैठना है। ध्यान रहे सम्पूर्ण शरीर के साथ आपके पैर भी आसन पर ही हो, जमीन से ना छू रहे हो। घर के हर सदस्य का आसन और माला अलग अलग होनी चाहिए, ऐसा ना हो घर का हर सदस्य एक ही माला, एक ही आसन इस्तेमाल करे। ऐसा करने से हर एक की ऊर्जा शक्ति आपस में टकराएगी, जो घर में लड़ाई झगड़े का कारण भी बन सकती हैं।सबसे पहले जमीन पर आसन बीछाइए , आसन को नमन करे, सुखासन,पद्मासन, अर्धपादमसं जिसमें भी कंफर्टेबल फील हो बैठ सकते हो।मंत्र जाप माला करते वक़्त मेरुदंड सीधा होना चाहिए , झुककर ना बैठे, ना ही दीवार का या किसी चीज का सहारा लेकर बैठे। मंत्र जप के वक़्त तर्जनी और छोटी उंगली आपस में टकरानी नहीं चाहिए,ना ही नाखून माला को छूना चाहिए, व ऐसा करने से मंत्र जाप के फल से वंचित रह सकते हो। माला करते वक़्त आंखे बंद रखे,वताकी संपूर्णता से बाहर की दुनिया से संपर्क विच्छेद हो जाए,ना ही किसी से बात करे ,ना ही कोई जवाब दे।वह समय आत्मा की अध्यात्मिक उन्नति के लिए रखे
