सकारात्मक ऊर्जा मंत्र का उपयोग किसी बीमार व्यक्ति को ठीक करने में भी कर सकते हैं। पॉजिटिव एनर्जी को चैनलाइज करके।यदि कोई व्यक्ति आपके घर में लंबी बीमारी से ग्रसित है या बार बार बीमार पड़ता हो,उसके आसपास या उसके कमरे आपकी सकारात्मक ऊर्जा को channelize करके उसे कोई भी बीमारी से निजात दिला सकते है। बीमारी होने का मतलब ही है नकारात्मक ऊर्जा, चक्रों में अवरोध, भावनात्मक मानसिक दबाव, स्ट्रेस, टेंशन, डिप्रेशन। घर के सदस्य सकारात्मक रहकर मरीज को पॉजिटिविटी डायवर्ट करके मरीज को मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए तैयार कर सकते है। क्युकी सकारात्मक ऊर्जा ही सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकती हैं।ऐसा करना ही मरीज की खोई हुई शक्ति पुनर्जीवित कर सकती हैं। यही है सकारात्मक ऊर्जा मंत्र।
सकारात्मक ऊर्जा मंत्र
हमारे चारो तरफ ऊर्जा फैली हुई है, जो कुछ भी बना या जीवन में कुछ भी अच्छा बुरा घटित होता वह ऊर्जा के कारण। हमारे सकारातमकता से सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होगी |
सकारात्मक प्रतिक्रिया
मरीज के लिए घर में शांति पीसफुलनेस का वातावरण तैयार करे। मरीज से हमेशा पॉजिटिव तरीके से ही बात करे, निराशावादी,या दिल को आघात पहुंचे ऐसा मरीज से कदापि बात ना करे। उसे तस्सल्ली,दिलासा दिलाते रहे। यही सब पॉजिटिव ऊर्जा, पॉजिटिव सोच, आपकी पॉजिटिव वाइब्स क्रिएट करेंगी जो मरीज के अंदर की नकारात्मकता को दूर करेगी। शरीर के एक एक सेल को चार्ज करेंगी , बॉडी सेल डैमेज होने के कारण ही शरीर से बीमारी के रूप में बाहर निकलते हैं। आपकी सकारात्मक प्रक्रिया ही मरीज को बीमारी बाहर खींच के निकालेगी।
मरीज के जीवन में मानसिक प्रफुलता लाने से वह अपनेआप ही उदासीनता के चक्रव्यूह से मुक्त होगा, यही कारण बनेगा उसको बीमारी से पीछा छुड़ाने का। आपका मोटिवेशन, आपका सपोर्ट,ही बीमार व्यक्ति को एक नई ऊर्जा से भर देगा।आत्म परिवर्तन मनोबल को बढ़ाएग, मनोबल से बीमारी कोभगाएगी ।ऐसा करना,जैसे घोर अंधकार में उजाले की छोटी सी किरण, जो घना अंधेरा दूर करने में सक्षम है।
बीमारी खत्म करने के टोटके
१)मरीज जो कमरे में उस कमरे की खिड़की पूरा दिन बंद करके ना रखे, खिड़की साइड से तो थोड़ी खुली रखे।
२) मरीज के कमरे में ही मरीज के सामने लेनी वाली दवाइयों को लाइन से लगाकर रखने से मरीज की नजर उस पर पड़ती रहती , सब कॉन्शियस माइंड में ये मेसेज जाता रहता , ये मेरी दवाइयां मुझे लेना है, इस तरह से मरीज को ठीक होने में और विलंब होगा।
३) मरीज के पीने का पानी प्लास्टिक की बोतल में भरकर नहीं रखे, हरे कांच की बोतल में भरकर रखें, हरा रंग हृदय चक्र से संबंधित है, मरीज के दिल में पॉजिटिव सोच उत्तपन्न होंगे, या फिर ताजा पानी दे जब भी जरूरत हो ।
४) दवाइयों को हाथ में पकड़कर पॉजिटिव वाइब्रेशन डालिए, पॉजिटिव संदेश डालिए, जो मरीज का नाम है , जल्दी ठीक हो गया है (वीडियो में देखिए समझ आएगा)।
५) मरीज के कमरे में किसी कोने में गायत्री मंत्र, हनुमान चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र का जाप बहुत धीमी आवाज में लगाइए, पॉजिटिव एनर्जी क्रिएट होगी, नेगेटिविटी मरीज के कमरे से, औरा बॉडी से, मेंटल इमोशन बॉडी से बाहर निकल जाएगी।
६) बाथरूम में पहनने की चप्पल ,चाहे मरीज की ही क्यों ना हो कमरे से बाहर ही रखे, बाथरूम में बैक्टीरिया पनपते है, चप्पल में चिपके रहने के कारण बीमारी को और बढ़ावा मिलता है।
७) संध्या के वक़्त यदि मरीज को कंफर्टेबल फील हो तो कम सुगंध वाली पांच अगरबत्ती जलाए
८)कोई भी मेहमान मिलने आए तो उसे मरीज के बेड पर बैठने के लिए मना करे,साथ ही मरीज के बारे में जो भी बात करनी हो उसके सामने ना करे,पेशंट के दिमाग में सबकॉन्शियस माइंड में संदेश दे रहे वह कोई बीमारी से ग्रसित है, यही कारण उसे कन्शियोस लेवल पर ठीक होने में दिक्कत करेगा।
९) मरीज से मिलने आने वालों से कोई भी खाने की सामग्री नहीं स्वीकार करे, इसके पीछे भी मुख्य कारण है, देने वाले के इमोशन जुड़ जाते हैं, नेगेटिविटी क्रिएट करते , खाने से यदि मरीज खाए तो वह सोच, विचार , इमोशन खाने के साथ शरीर में प्रवेश करेंगे, दिमागी तौर पर कमजोर करने से मरीज का मनोबल कम हो सकता हैं।
आखरी और मुद्दे की बात, मरीज के ठीक होने के बाद उसकी बची हुई दवाई, बेड पान, व्हील चेयर जैसी कोई भी चीज फ्री में किसी को से दीजिए, ये सोच कर ना रखे की अगली बार काम आयेगा, ऐसा करके बीमारी को जाने भी नहीं दे रहे हो, आने का दावत दे रहे हो।
