ॐ नमः शिवाय शिवजी सदा सहाय
ॐ यह भगवान शिव के डमरू से उत्पन्न श्रृष्टि का पहला मंत्र है। ॐ नमः शिवाय मंत्र – मंत्र को सही तरीके से सांसों साथ तालमेल बैठाकर उच्चारण किया जाए तो आपके जीवन में एक एक चमत्कार होते हुए देखते जाइए। सही तरीका यही है कि आपको अंदर सांस खींचते हुए ॐ बोलना है और गहरी सांस छोड़ते हुए नमः शिवाय कहना है। शिव पुराण मे इस मंत्र का महत्व बहुत विस्तार से बताया गया है। इसी सांसों के क्रम के साथ सच्ची श्रद्धा से उच्चारित करें तो ब्रह्म को भी प्राप्त हो सकते हैं।
शिव पुराण में इस मंत्र जाप का बहुत महत्व बताया गया है। शिव पुराण के अनुसार यदि कोई भी भक्त सच्ची श्रद्धा से उच्चारित करें तो ब्रह्म को भी प्राप्त हो सकते हैं। इस मंत्र में श्रृष्टि की सारी शक्तियां समाहित है। इसके निरंतर जप से आपके अंदर भी सारी श्रृष्टि की सारी शक्तियां हो सकती हैं। ॐ नमः शिवाय मंत्र उच्चारण चाहे जोर जोर से करे या मन ही मन करे इस से जो स्पंदन उत्पन्न होता हैं, ये भक्त की आत्मा को शांति प्रदान करता है और साथ ही पवित्र और शुद्ध भी करता है। वाचिक जप से मानसिक जप अधिक प्रभावशाली है।
ॐ ऐं ह्लीं क्लीं नमः शिवाय
यह एक हीलिंग मंत्र है। इसमें अद्भुत हीलिंग पावर है, ऐसी शक्ति है जो किसी भी भक्त को कोई भी समस्या से छुटकारा मिल सकता है इस मंत्र के विधिवत निरंतर जप से।ये अवचेतन मन को एकाग्र कर जागृत करता है और चेतन मन को शांति का और शुभ संदेश पहुंचता है।
किसी भी जटिल रोग से मुक्ति पाने का मार्ग प्रशस्त करता है। रोग की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर या फिर उचित डॉक्टर, दवाई का जिनकी रोगी को जरूरत है कुछ ना कुछ कनेक्शन जोड़कर मार्ग बनता जाता हैं।
Mental depression, tension मे हो तो ॐ नमः शिवाय मंत्र के निरंतर जप से मुक्ति पाया जा सकता है। यदि भगवन शिव पर सच्ची श्रद्धा और आस्था के साथ शिव को समर्पित होकर, स्मरण करते हुए यह मंत्र जाप किया जाए तो भक्त को किसी और सहारे की जरूरत ही नहीं है। भगवन शिव ही उसको मार्ग दिखाएंगे, हर मुसीबत से बाहर निकलेंगे शिवजी को यदि आप खुदको सरेंडर कर दिया तो फिर चमत्कार देखिए आपके जीवन में।
ॐ नमः शिवाय पंचाक्षरी मंत्र
ॐ नमः शिवाय यह पंचाक्षरी मंत्र का प्रतिपादन स्वयं भगवन शिव ने हम देहधारी मनुष्यो के लिए किया हैं। इस विशेष मंत्र के पांच अक्षर प्रकृति के पांच तत्व से विदित है जैसे न से पृथ्वी, मः से जल, शी से अग्नि, वा से वायु, य से आकाश। इसका अर्थ यही है कि शिव सर्वव्यापी संपूर्ण ब्रह्मांड में स्थित हैं।
ॐ नमः शिवाय मंत्र विभिन्न सिद्धियों से युक्त है। यह शिवभक्ति मंत्र भक्तो की आत्मा को निर्मल पवित्र और शुद्ध करता है। इसके जपने से हर मनोरथ मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह मनुष्य के समस्त दुखों को समाप्त करने की क्षमता रखता है। यदि मंत्र जप आपने डमरू बजा बजा कर बम बम भोले की जयजयकर के साथ किया तो आपको भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती हैं।
निरंतर जप से सातों चक्र में वाइब्रेशन महसूस कर सकते है। कुंडलिनी शक्ति जो सुप्त अवस्था में है वह जागृत हो सकती हैं। यदि विशुधी , यानी throat chakra ब्लॉक है ओपन हो सकता है। थायराइड ग्रंथि में उत्तेजना हो सकती हैं। जिससे थायराइड ग्रंथि संतुलित होती हैं। हाइपर थायराइड हो या हाइपो थायरॉडिज्म, छुटकारा मिल सकता है। यह मन में बसे भय को भी दूर करता है। भक्तो के मन में आशा और विश्वास जागता है। निर्णय करने की क्षमता को बढ़ाता है।
ॐ नमः शिवाय शिवाय नमः ॐ
भगवान शिव के सिर पर चंद्रमा स्थाई रूप में स्थित हैं। चंद्रमा जो कि एक शीतलता और शांति का प्रतीक माना जाता हैं। जिसका अर्थ है भगवान शिव हमेशा दिमाग से दिल से हर प्रकार से संतुलित है। उन्हें क्रोध भी आने का कारण होता हैं उचित समय और उचित कारण पर ही वे क्रोधित होते है। यही संदेश हम मानव जीवन के लिए भी देते हैं कि जीवन में संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी हैं।
शरीर पर राख मलकर रखते हैं। जिसका अर्थ है की यह शरीर पंचतत्व से बना है और पंचतत्व में ही विलीन होगा यही जीवन की सच्चाई है। अंत होना भ यही अंतिम वास्तविकता है।
भगवान शिव बाघ की त्वचा पर बैठकर ध्यान साधना करते हैं जिसका अर्थ है इच्छा, जिसने भी अपनी इच्छाओं पर काबू पा लिया उसने जीवन को, खुद की आत्मशक्ति पर विजय प्राप्त कर लिया।स्वयं के लिए मोक्ष मार्ग को पा लिया है। इच्छाओं के कारण ही जीवात्मा जन्म मरण के चक्रव्यूह में फसी रहती हैं।
