मूलाधार चक्र रहस्य
इस चक्र के देवता भगवान गणेश है। जैसे यह चक्र का नाम है मूलाधार , मूल या आधार से पता चलता है कि इसका केंद्र बिंदु रीढ़ की हड्डी के आधार पर स्थित है।यह चक्र पृथ्वी तत्व है ।यह उपर के पांच चक्रों को स्थिरता देता हैं।यह चक्र शारीरिक इच्छाओं को भी नियंत्रित करता है।
स्वाधिष्ठान चक्र
इस चक्र के देवता ब्रह्माजी है। यह चक्र सुषुम्ना नाड़ी के भीतर स्थित हैं। यह चक्र जल तत्व है। जिसका यह चक्र जागृत रहता हैं उसे पानी से कोई भय नहीं रहता। यह प्रजनन अंगो की क्रिया को नियंत्रित करता है। जैसे ओवल्यूशन, स्पर्म डेवलपमेंट, mensturation cycle , इत्यादि।
मणिपुर चक्र रहस्य
इस चक्र के देवता भगवान विष्णु हैं। साधक इस चक्र पर ध्यान लगाकर कई सिद्धियां प्राप्त कर सकता हैं। पृथ्वी में छिपे हुए खजाने की खोज,किसी भी रोग से पीड़ित ना होना। जीवन भर निरोगी काया का होना। साधक को अग्नि से भी भय निकल जाता हैं इनके मन से। जलती हुई अग्नि में प्रवेश कर सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार ये भोजन को पचाकर शरीर में पाचक रस पहुंचाने का काम करता है।यह पाचन तंत्र का केंद्र बिंदु है। कर्म के आधार पर संतुलित भोजन करने से ये चक्र संतुलित रहता है।
अनाहत चक्र
यह चक्र के देवता भगवान शिव हैं। साधक जब इस चक्र पर ध्यान केंद्रित करते है तो वह वायु पर पूर्ण नियंत्रण कर पाते हैं। यहां तक कि हवा में उड़ने की भी क्षमता रखते हैं।इसी चक्र से आप एक कल्पवृक्ष के भांति भी अपनी सारी इच्छाएं आकांक्षाएं पुरी कर सकते हैं। यह चक्र शरीर में हृदय में स्थित है।यह चक्र हृदय, फेफड़ों पर कार्यरत है। इसका काम पूरे शरीर में oxygenated blood पहुंचाने का काम है।
विशुद्धि चक्र
इस चक्र के देवता है रुद्र भगवान्।यह सांस नली में सांसो को शुद्धता से पहुंचाने का काम करता है। यदि यह कार्य ठीक से नहीं हो पाता तो गले की ग्रन्थि प्रभावित होने से थायरॉयड जैसे बीमारी हो सकती हैं। इस चक्र पर ध्यान लगाने से चारो वेदों का ज्ञान हो जाता हैं।यदि अनुचित भाषा या दूसरों को कटाक्ष, बुराई, चुगली करने से भी यह चक्र ब्लॉक हो सकता हैं।
आज्ञाकार चक्र
यह आत्मा का स्थान है। दोनों भौहों के बीच स्थित है। इस चक्र का काम है मेमोरी स्टोर करना और पुनः मेमोरी को वापिस लाने में मदद करना।इस चक्र पर ध्यान केंद्रित करने से याददाश्त तेज होती हैं। इस चक्र पर ध्यान केंद्रित करने से पहले के जन्म के सारे कर्म नष्ट हो जाते हैं।इस चक्र पर ध्यान साधना करने पर शब्दों में वर्णित नही किया जा सकता ऐसे ऐसे ब्रह्मांड की ओर से लाभान्वित हो सकते,अनेकों सिद्धियों की प्राप्ति होती है।
सहास्त्रार चक्र
यह चक्र परब्रह्म से सीधा मिलन करवाता है।इस चक्र का सीधा संबंध ब्रह्मांड की ऊर्जा से है।हर इंसान को दिव्य ऊर्जा शक्ति इसी चक्र से मिलती है । मस्तिष्क में स्थित साइको फिजियोलॉजी के संतुलन को बनाए रखता है। अर्थात् नींद और मनोवैज्ञानिक समस्याओं से संबंधित हैं।यह पीनल ग्लैंड, ब्रेन, पिट्यूटरी ग्रंथि, नर्वस सिस्टम को नियंत्रित करता है।यह चक्र जागृत होने पर साधक ब्रह्मलीन हो जाता हैं
ॐ नमः शिवाय












