मोक्ष मोक्ष मोक्ष मुझे मोक्ष चहिए, मोक्ष का अर्थ तो जान लू, मुक्ति मिलती नहीं , मोक्ष का तात्पर्य मुक्ति ये तो पहचान लू ।।

मुक्ति पर किससे मुक्ति
या खुद से ही मुक्त होने की युक्ति,
या हर बंधनो से बंधनमुक्त तृप्ति।।
या संचित कर लू सभी कर्मों को ख़त्म करने की शक्ति।।

कर्म क्या है, इच्छाओं से जन्मे कर्म
कर्म का अर्थ है मोह माया
और मोह माया का अर्थ है,
मोह में मोहित हो गया ये मन और माया
जो कि है पंचतत्व का शरीर, मिट्टी की काया।।

पर काया क्या है एक कर्मों को ख़त्म करने का माध्यम ,
ताकि मिले मोहमाया से मुक्ति और ईश्वर से एकाकार होकर हो जाए मिलन।।

ईश्वर ने ही बनाया ये संपूर्ण ब्रह्मांड, हम जीवात्माओं के लिए रची ये श्रृष्टि, ताकि हम जीवात्माओं के कर्म के बोझ हटे, मिल सके आध्यात्मिक दृष्टि।।

कर्म किए जाओ बंधनो में बंधने में ही हैं जीवन का धर्म,
मोक्ष पाने के लिए पहले शून्य करने होंगे जन्मों से संचित किए कर्म।।

जीवन ही अनुभव है अनुभव ही ध्यान,
कर्म को पुरा करते करते ही मिलेगा मोक्ष प्राप्ति हेतु ज्ञान।।

